मैं खुशी हूँ...

मैं खुशी हूँ...

इस भागती दौङती ज़िन्दगी में
राहत की सांस हूँ
किसी से दूर किसी के पास
मैं खुशी हूँ...

इन्सान की चाहत हूँ मैं
एक खूबसूरत अहसास हूँ
महसूस करते हो कभी –कभी मुझे
मैं खुशी हूँ...

कभी दिल में घर करती हूँ
कभी चेहरे पर दिखती हूँ
हसरत है मेरी सबको
मैं खुशी हूँ...

हर दुआ में मुझे माँगते हो
साथ ज़िन्दगी भर चाहते हो
पर पाकर मुझे भूल जाते हैं
मैं खुशी हूँ...

आशियाना कोई नहीं है मेरा
कभी यहाँ तो कभी वहाँ रहती हूँ
आँखे बंद करो और महसूस करो
मैं खुशी हूँ...।

9 टिप्पणियाँ:

आशियाना कोई नहीं है मेरा
कभी यहाँ तो कभी वहाँ रहती हूँ
आँखे बंद करो और महसूस करो
मैं खुशी हूँ...

bahoot achhee kalpana hai... har koi chaahta hai khushi par milti nahi hai ... sabke dil mein rahti hai par koi dekhta nahi hai ...

 

हर दुआ में मुझे माँगते हो
साथ ज़िन्दगी भर चाहते हो
पर पाकर मुझे भूल जाते हैं
मैं खुशी हूँ...

 

bahut hi sundar bhaaw hai............

 

मैं खुशी हूँ...

इस भागती दौङती ज़िन्दगी में
राहत की सांस हूँ
किसी से दूर किसी के पास
मैं खुशी हूँ...

SUNDER KAVITA

 

बहुत ही अच्‍छी कविता लिखी है
आपने काबिलेतारीफ बेहतरीन


SANJAY KUMAR
HARYANA
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

 

अच्छा लगा ख़ुशी से मिल कर :)

 

एक शब्द/आवश्यकता...जिसकी हर इनसान को ज़रूरत है....उसका काफ़ी अच्छा चित्रण किया है आपने....और फि़र मुझे लगता है कि खुशी के बारे में आप ज़्यादा अच्छा समझती होंगी....क्यों....सही कहा ना मैंने....खुशी..

 

behtareen yaar bahut achcha likha hai. realy very nice poetry...mind blowing

 

हर दुआ में मुझे माँगते हो
साथ ज़िन्दगी भर चाहते हो
पर पाकर मुझे भूल जाते हैं
मैं खुशी हूँ...

Shabnam kya kahun.......ab...... in panktiyon ne dil chhoo liyahai....

speechless kar diya hai......


bahut hi oomda rachna....

 

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