हमारा वतन


जन्नत का नमूना था हमारा वतन मगर
गंदी सियासत ने जहन्नम बना दिया

दिल को नाशाद करके छोङा है
काशी लूटी है क़ाबा तोङा है
इन फ़सादात ने तो भारत की
एकता का लहू निचोङा है

11 टिप्पणियाँ:

शबनम जी ने जो किया कुछ पंक्ति में पेश।
सचमुच ये हालात हैं कौन बचाये देश?

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com

 

यही हालात है

 

जन्नत का नमूना था हमारा वतन मगर
गंदी सियासत ने जहन्नम बना दिया.....
..ekdam sahi kaha aapne...mai aapka dard samajh sakta hoon...

 

इन फ़सादात ने तो भारत की
एकता का लहू निचोङा है
बिलकुल सही कहा शुभकामनायें

 

बहुत खूब लिखा है आपने।
सच में....
जन्नत का नमूना था हमारा वतन मगर
गंदी सियासत ने जहन्नम बना दिया।

अच्छे खासे इन्सान थे हम
बिना संवेदनाओं की जिन्दा लाश हो गये हैं।

 

दिल को नाशाद करके छोङा है
काशी लूटी है क़ाबा तोङा है
इन फ़सादात ने तो भारत की
एकता का लहू निचोङा है

bahut khoob........

Shabnam.....mujhe tumhe aisa likhte dekh kar bahut khushi ho rahi hai.......

 

अच्छा लिखा है आपने । सहज विचार, संवेदनशीलता और रचना शिल्प की कलात्मकता प्रभावित करती है ।

मैने भी अपने ब्लाग पर एक लेख लिखा है-घरेलू हिंसा से लहूलुहान महिलाओं का तन और मन-समय हो तो पढ़ें और कमेंट भी दें ।
http://www.ashokvichar.blogspot.com

कविताओं पर भी आपकी राय अपेक्षित है। कविता का ब्लाग है-
http://drashokpriyaranjan.blogspot.com

 

बहुत खूब लिखा है आपने।

 

वाह.....
एकदम यथार्थ.......

 

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