अन्जाम-ए-मौहोब्बत


होठो की मुस्कुराहट
दिल में न उतर पायी
तुझे खुद से दूर कर दिया
पर खुद दूर न हो पाई....

ये कैसा इम्तेहा है
ये कैसी मजबूरियाँ
सब कुछ कह दिया
पर कुछ भी न कह पायी

अंधेरो में तलाशा तुझे
उजाले मैं कर न पायी
आँखों की नमी को
सबसे छुपाती चली आयी

अन्जाम-ए-मौहोब्बत क्या था
सिर्फ दर्द और तनहाई
हर लम्हा इस दिल को
तेरी ही याद आयी.....

27 टिप्पणियाँ:

भावों को इतनी सुंदरता से शब्दों में पिरोया है
सुंदर रचना....

Sanjay kumar
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

 

अन्जाम-ए-मौहोब्बत क्या था
सिर्फ दर्द और तनहाई
हर लम्हा इस दिल को
तेरी ही याद आयी...
behtreen rachna..........

 

BAHUT SUNDAR RACHNA .AAP ACCHA LIKHTI HAI.BADHAI...LIKHTI RAHE....

 

अन्जाम-ए-मौहोब्बत क्या था
सिर्फ दर्द और तनहाई
हर लम्हा इस दिल को
तेरी ही याद आयी.....

वाह जी क्या बात है , इतनी बढ़िया रचना आप तो छा गयीं इक दम । झक्कास लगी आपकी ये रचना

 

ये कैसा इम्तेहा है
ये कैसी मजबूरियाँ
सब कुछ कह दिया
पर कुछ भी न कह पायी
वाह शबनम अच्छी शायरी, बहुत सुंदर.

 

जानता हूँ तुम्हारी मोहब्बत को.......

 

कैसे लिख लेती हो इतना अच्छा।

 

शबनम साहिबा,
हर नई रचना में नयापन और निखार नज़र आता है
अंधेरो में तलाशा तुझे
उजाले मैं कर न पायी
आँखों की नमी को
सबसे छुपाती चली आयी
अलग अहसास पेश किया है, मुबारकबाद
शाहिद मिर्ज़ा शाहिद

 

शबनम.... सबसे पहले तो माफ़ी चाहूगा.... क्यूंकि ...तबियत खराब होने कि वजह से उतना एक्टिव नहीं रह पाया....और सिस्टम भी काफी प्रॉब्लम दे रहा था .... I am extremely sorry........ इसलिए देरी से आने के लिए माफी चाहता हूँ.... और इतनी सुंदर कविता पढ़ाने के लिए शुक्रगुज़ार हूँ....

 

कविता के साथ मोहक चित्र ने प्रभाव भर दिया है प्रविष्टि में !
प्रस्तुति का आभार ।

 

सुंदर कविता



चर्चा आपकी "चर्चा मंच" पर

 

BAHUT HI SUNDAR AUR GAHAN BHAVON KO SAMETA HAI.

 

hummmmmmmmmmmmmmmmmm.......sabhi jante hai jo iss samundar main gya ....bahut gahra gya!! but phir bhi koi bhi iss se bachna nahi chahta bas doobna chahta hai.....
just like ur kavita.........


Jai Ho Mangalmay Ho

 

soft likhti hay aap.
itni gahrai kahan se lati hay
achchha laga
likhte rahiye log padhte rahenge.

 

अन्जाम-ए-मौहोब्बत क्या था
सिर्फ दर्द और तनहाई
हर लम्हा इस दिल को
तेरी ही याद आयी.....

DARDR BHARI DAASTAAN HAI ... HAR MUHABBAT KA YE HI ANJAAM HAI ... BAHUT LAJAWAAB LIKHA HAI ...

 

सुंदर और इंटेंस.

 

हां, अंजाम तो दर्द है पर ये दर्द दर्द ही नहीं दवा भी है। ऐसा इस दर्द में डूबने वालों का अनुभव है।

 
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
 

thanks shabnam ji lines pasand karne k liye . hope u keep visiting .....my blog .
http://www.vinay-thoughts.blogspot.com/

 

इस सुन्दर रचना के लिए
बहुत बहुत आभार ..............
एवं नव वर्ष की हार्दिक शुभ कामनाएं .........

 

achhi rachna he..
अंधेरो में तलाशा तुझे
उजाले मैं कर न पायी
आँखों की नमी को
सबसे छुपाती चली आयी

ye panktiya bahut achhi he.

 

Masha Allah aap likhne ke andaaz se kafi mutassir hue hai... apka andaaz e bayan kabile tareef hai ....har matle ko aapne bahut hi khoobsurti se pesh kiya hai ....aapki tareef ke liye....hamare pass alfaaz hi nahi hai ....
waqt mile to aap hamare blogs par aakar apni rai dekar hume do chaar kijiye...badi khushi hogi agar aap jaise shaksh hamare blogs par aana hua.....ALLAH HAFIZ
best regards
aleem azmi
bloggers
http://aleemazmi.blogspot.com/

 

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