क्या वो है.....?

वो ऐसी आग जिसमें धुआँ नहीं..

एक ऐसा हादसा जो कभी हुआ नहीं..

एक ऐसी नदी जिसका किनारा नही..

एक ऐसा भँवरा जो आवारा नही..


वो ऐसी पहेली जिसका जवाब नहीं..

एक ऐसी कहानी जिसका अन्त नहीं..

एक ऐसी ग़ज़ल जिसमें जज़्बात नहीं..

एक ऐसी किताब जिसमें अक्षर नही..


वो ऐसी नींद जिसमें ख्वाब नहीं..

एक ऐसा दिन जिसकी रात नही.

एक ऐसी मौहब्बत जिसमें अहसास नहीं

एक ऐसा रेगिस्तान जिसे प्यास नहीं


वो सिर्फ एक भ्रम है कोई हक़ीकत नहीं

क्या वो है या है ही नहीं?

20 टिप्पणियाँ:

कौन है वो ...हकीकत या कल्पना ...
कतारबद्ध प्रश्नों ने एक सुन्दर कविता बना ही दी ...
नव वर्ष की बहुत शुभकामनायें ......!!

 

आप सब को सपरिवार नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाऎँ!!

 

वो है पर वो नहीं है याने कि वो होके भी नहीं है!

सुन्दर रचना!

आप तथा आपके परिजनों के लिये नववर्ष मंगलमय हो!

 

बहुत गहन रचना!

बधाई.

 

बहुत भाव पूर्ण रचना है।बधाई।

 

सुन्दर रचना।

 

बहुत सुन्दर रचना।
आप को ओर आप के परिवार को नववर्ष की बहुत बधाई एवं अनेक शुभकामनाए

 

शबनम साहिबा
खूबसूरत अहसास पिरोये हैं नज्म में
आपको नये साल की बहुत बहुत मुबारकबाद
शाहिद मिर्ज़ा शाहिद

 

नये वर्ष की शुभकामनाओं सहित

आपसे अपेक्षा है कि आप हिन्दी के प्रति अपना मोह नहीं त्यागेंगे और ब्लाग संसार में नित सार्थक लेखन के प्रति सचेत रहेंगे।

अपने ब्लाग लेखन को विस्तार देने के साथ-साथ नये लोगों को भी ब्लाग लेखन के प्रति जागरूक कर हिन्दी सेवा में अपना योगदान दें।

आपका लेखन हम सभी को और सार्थकता प्रदान करे, इसी आशा के साथ

डा0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर

जय-जय बुन्देलखण्ड

 

अच्‍छी पहेलियॉं है ।

यह ऐसा ही है जैसे ठंडी आग या वृत्‍ताकार त्रिभुज । अस्त्तिवहीन ।

फिर यदि हकीकत हो तो खुलासा करना चाहिए ।

 

वो सिर्फ एक भ्रम है कोई हक़ीकत नहीं
क्या वो है या है ही नहीं?

ब्रह्मसत्यम जगत मिथ्या?

नव वर्ष मंगलमय हो!

 
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
 

Eबहुत खूब शबनम जी ह्रदय की उथल पुथल को शब्द देती हुई कविता विरोधा भाषी परन्तु गहन कविता मेरी बधाई स्वीकार करे
सादर
प्रवीण पथिक
9971969084

 

kyonki main bhi jhuthh nahin boltii

नए साल में हिन्दी ब्लागिंग का परचम बुलंद हो
स्वस्थ २०१० हो
मंगलमय २०१० हो

पर मैं अपना एक एतराज दर्ज कराना चाहती हूँ
सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगर के लिए जो वोटिंग हो रही है ,मैं आपसे पूछना चाहती हूँ की भारतीय लोकतंत्र की तरह ब्लाग्तंत्र की यह पहली प्रक्रिया ही इतनी भ्रष्ट क्यों है ,महिलाओं को ५०%तो छोडिये १०%भी आरक्षण नहीं

 

yaha bhi arkshan???alka ji......
ab kya kahu.....ye arakshan mujhe lagta nhi blogging ki duniya me mayene bhi rakhta ha....
khula manch kehte toh ha ise sab par rehne nhi de rahe....blogging ki duniya me jo mahilaye ha vo kisi arakshan ki mohtaj nhi ha...are mujhme aur apme bohot kuch ha alka ji...hme kya zaroort.....ban jaye koi bhi sarvshreshtha blogger...kya isse blogging badal jayegi?nhi...
lekin ek baat to ha yaha bhi ek race lagne lagi ha.....
uff......
bhagte raho bhagte raho.........

 

bahut khoob...andaaze bayan kaabeli taarif hai..ati sundar..
likhti raheye

 

वो सिर्फ एक भ्रम है कोई हक़ीकत नहीं
क्या वो है या है ही नहीं?

HONE AUR NA HONE KE BEECH BHATAKTI BEMISAAL RACHNA HAI ...
NAYE SAAL KI BAHUT BAHUTY MUBAARAK ....

 

एक टिप्पणी भेजें