शीर्षकहीन कविता

ज़िंदगी थामे
रफ्तार का दामन
यूं आगे बढ़ी यूं आगे बढ़ी..
मैं लड़खड़ाकर
इक बार जो गिरी
फिर संभल न सकी
वापस चल न सकी..
वक़्त बढ़ता गया
फासले बढ़ चले
मेरे हाथों से फिसली
खुशी जो इक दफा
फिर वापस मिल न सकी
होठों पर खिल न सकी..

झांसी का किला देखिए तस्वीरों में






कुछ दिन पहले झांसी जाना हुआ... वहां झांसी की पहचान 'झांसी का किला ' देखा.... ऊंचाई पर बसा ये किला वाकई बहुत खूबसूरत है.
किले का रखरखाव काफी अच्छा है और हरियाली ने किले की खूबसूरती में चार चांद लगाए हुए हैं. किला कांफी ऊंचाई पर बना है जिस वजह से यहां से पूरे झांसी का नज़ारा देखा जा सकता है. अगर मौका मिले तो शाम को किला घूमिए, जब वहां लाइट्स जलती है तो और सुंदर लगता है.

नया रिश्ता


सुबह-सुबह दरवाज़े पर
सूरज की पहली किरण
संग आज ले आई
एक नया महमान
एक ताज़ी हवा का झोंका,
मुझे देख
वो कुछ मुस्कुराया
कुछ हिचकिचाया
फिर बना लिया मुझसे
एक रिश्ता नया,
रुख्सारों को सहलाकर
बालों को उलझाकर
वो फैल गया कमरे में,
धूल से ढकी
कुछ पुरानी तस्वीरों संग
खेला वो झोंका हवा का,
मेरी खुली डायरी को
पन्ने दर पन्ने पलटकर
बांचता रहा कुछ देर
मुझे कुछ जान समझकर
वो आगे बढ़ा,
कानों में कुछ फुसफुसाया
और कहा
कल फिर मिलने आउंगा
जब तुम अपने जज्बातों को
डायरी में बंद करके
खुदको तनहा करके
नींद में होगी
तब चुपके से
तुम्हारी खिड़की से आकर
हौले से तुम्हें जगाउंगा..